शनिवार, 11 फ़रवरी 2012

हिन्दू धर्म


१ ऐसा धर्म जिसमे हजारो जातिया जुडी हुई है … गर्व से कहो हम हिन्दू है …
भारतवर्ष को प्राचीन ऋषियों ने “हिन्दुस्थान” नाम दिया था जिसका अपभ्रंश “हिन्दुस्तान” है। “बृहस्पति आगम” के अनुसार:
हिमालयात् समारभ्य यावत् इन्दु सरोवरम्। तं देवनिर्मितं देशं हिन्दुस्थानं प्रचक्षते॥
अर्थात, हिमालय से प्रारम्भ होकर इन्दु सरोवर (हिन्द महासागर) तक यह देव निर्मित देश हिन्दुस्थान कहलाता है।हिन्दी में इस धर्म को सनातन धर्म अथवा वैदिक धर्म भी कहते हैं।विश्व के सभी धर्मों में सबसे पुराना धर्म है। ये वेदों पर आधारित धर्म है, जो अपने अन्दर कई अलग अलग उपासना पद्धतियाँ, मत, सम्प्रदाय, और दर्शन समेटे हुए है। इसमें कई देवी-देवताओं की पूजा की जाती है, लेकिन वास्तव में यह एकेश्वरवादी धर्म है।
हिन्दू धर्म का इतिहास
हिन्दू धर्म का १९६०८५३११० साल का इतिहास हैं। भारत (और आधुनिक पाकिस्तानी क्षेत्र) की सिन्धु घाटी सभ्यता में हिन्दू धर्म के कई चिह्न मिलते हैं। इनमें एक अज्ञात मातृदेवी की मूर्तियाँ, शिव पशुपति जैसे देवता की मुद्राएँ, लिंग, पीपल की पूजा, इत्यादि प्रमुख हैं। इतिहासकारों के एक दृष्टिकोण के अनुसार इस सभ्यता के अन्त के दौरान मध्य एशिया से एक अन्य जाति का आगमन हुआ, जो स्वयं को आर्य कहते थे, और संस्कृत नाम की एक हिन्द यूरोपीय भाषा बोलते थे। एक अन्य दृष्टिकोण के अनुसार सिन्धु घाटी सभ्यता के लोग स्वयं ही आर्य थे और उनका मूलस्थान भारत ही था।
आर्यों की सभ्यता को वैदिक सभ्यता कहते हैं। पहले दृष्टिकोण के अनुसार लगभग १७०० ईसा पूर्व में आर्य अफ़्ग़ानिस्तान, कश्मीर, पंजाब और हरियाणा में बस गये। तभी से वो लोग (उनके विद्वान ऋषि) अपने देवताओं को प्रसन्न करने के लिये वैदिक संस्कृत में मन्त्र रचने लगे। पहले चार वेद रचे गये, जिनमें ऋग्वेद प्रथम था। उसके बाद उपनिषद जैसे ग्रन्थ आये। हिन्दू मान्यता के अनुसार वेद, उपनिषद आदि ग्रन्थ अनादि, नित्य हैं, ईश्वर की कृपा से अलग-अलग मन्त्रद्रष्टा ऋषियों को अलग-अलग ग्रन्थों का ज्ञान प्राप्त हुआ जिन्होंने फिर उन्हें लिपिबद्ध किया। बौद्ध और धर्मों के अलग हो जाने के बाद वैदिक धर्म मे काफ़ी परिवर्तन आया। नये देवता और नये दर्शन उभरे। इस तरह आधुनिक हिन्दू धर्म का जन्म हुआ।
दूसरे दृष्टिकोण के अनुसार हिन्दू धर्म का मूल कदाचित सिन्धु सरस्वती परम्परा (जिसका स्रोत मेहरगढ़ की ६५०० ईपू संस्कृति में मिलता है) से भी पहले की भारतीय परम्परा में है।
जिस संस्कृति या धर्म की उत्पत्ती एवं विकास भारत भूमि पर नहीं हुआ है, वह धर्म या संस्कृति भारतीय ( हिन्दू ) कैसे हो सकती है।
1. ईश्वर एक नाम अनेक
2. ब्रह्म या परम तत्त्व सर्वव्यापी है
3. ईश्वर से डरें नहीं, प्रेम करें और प्रेरणा लें
4. हिन्दुत्व का लक्ष्य स्वर्ग-नरक से ऊपर
5. हिन्दुओं में कोई एक पैगम्बर नहीं है, बल्कि अनेकों पैगंबर हैं.
6. धर्म की रक्षा के लिए ईश्वर बार-बार पैदा होते हैं
7. परोपकार पुण्य है दूसरों के कष्ट देना पाप है.
8. जीवमात्र की सेवा ही परमात्मा की सेवा है
9. स्त्री आदरणीय है
10. सती का अर्थ पति के प्रति सत्यनिष्ठा है
11. हिन्दुत्व का वास हिन्दू के मन, संस्कार और परम्पराओं में
12. पर्यावरण की रक्षा को उच्च प्राथमिकता
13. हिन्दू दृष्टि समतावादी एवं समन्वयवादी
14. आत्मा अजर-अमर है
15. सबसे बड़ा मंत्र गायत्री मंत्र
16. हिन्दुओं के पर्व और त्योहार खुशियों से जुड़े हैं
17. हिन्दुत्व का लक्ष्य पुरुषार्थ है और मध्य मार्ग को सर्वोत्तम माना गया है
18. हिन्दुत्व एकत्व का दर्शन है

हिन्दू लड़की का बलात धर्मपरिवर्तन कर मुस्लिम से शादी कराई


हिन्दू लड़की का बलात धर्मपरिवर्तन कर मुस्लिम से शादी कराई





कराची.पाकिस्तान के दक्षिणी शहर कराची में एक किशोरी हिन्दू लड़की को कथित तौर पर जबरदस्ती इस्लाम धर्म कबूल करवाकर एक मुस्लिम व्यक्ति से शादी करवा दी गई। लड़की के परिवार वालों ने थाने में मामला दर्ज कराया है।


लड़की की पहचान भारती नाम से हुई है। धर्म परिवर्तन के बाद उसका नाम आएशा कर दिया गया। एक्सप्रेस ट्रिब्यून अखबार के मुताबिक कराची के ल्यारी इलाके में यह 18वां ऐसा मामला है जिसमें बलात धर्मपरिवर्तन के बाद शादी कराई गई है।


लड़की के परिवार वालों ने आरोप लगाया है कि उसे जबरदस्ती इस्लाम धर्म कबूल करवा कर एक मुस्लिम आदमी से शादी करा दी गई।परिवार वालों ने बघदादी पुलिस स्टेशन में एफआईआर दर्ज कराया है।


स्थानीय अदालत अब मामले की सुनवाई कर रहा है।

अखबार के मुताबिक शनिवार को कोर्ट में पेशी के दौरान लड़की एक काले 'अबया' लिबास में आई और अपने माता-पिता की तरफ देख कर बमुश्किल नजर मिलाई।

लड़की के पिता नरेन दास ने बताया "उस पर अपनी मर्जी से धर्मपरिवर्तन की बात कहने का दबाव डाला जा रहा है,अगर वो ऐसा नहीं कहती है तो हमें नुकसान पहुचाने की धमकी दी जा रही है।"

भारती की मां दिल की मरीज हैं। अपनी बेटी के अदालत में एक बार भी उन्हें न देखे जाने से वह दुखी हैं।

उन्होंने कहा "वह मेरी एकमात्र बेटी है। वह मुझसे बात नहीं करना चाहती और न ही मिलना चाहती है। मैंने उसे जन्म दिया और पास-पोस कर बड़ा किया है।"

दास ने नेशनल डाटा बेस और पंजीयन प्राधिकरण के रिकॉर्ड से कॉपी निकाली है जो बताता है कि उनकी बेटी की उम्र 15 साल है।

हालांकि लड़की का इस्लाम धर्म में धर्मपरिवर्तन और शादी के कागजात में लड़की की उम्र 18 दर्शाई गई है। दास ने कहा "शादी के कागजात में उसके उम्र के साथ छेड़छाड़ की गई है। उसकी उम्र शादी लायक नहीं है।"

गुरुवार, 9 फ़रवरी 2012

मै हिन्दू हों: हिन्दू धर्म का इतिहास


मै हिन्दू हों: हिन्दू धर्म का इतिहास

हिन्दू मापन प्रणाली
हिन्दू धर्म का इतिहास अति प्राचीन है। इस धर्म को वेदकाल से भी पूर्व का माना जाता है, क्योंकि वैदिक काल और वेदों की रचना का काल अलग-अलग माना जाता है। यहां शताब्दियों से मौखिक परंपरा चलती रही, जिसके द्वारा इसका इतिहास व ग्रन्थ आगे बढ़ते रहे। उसके बाद इसे लिपिबद्ध करने का काल भी बहुत लंबा रहा है। हिन्दू धर्म के सर्वपूज्य ग्रन्थ हैं वेद। वेदों की रचना किसी एक काल में नहीं हुई। विद्वानों ने वेदों के रचनाकाल का आरंभ ४५०० ई.पू. से माना है। यानि यह धीरे-धीरे रचे गए और अंतत: पहले वेद को तीन भागों में संकलित किया गया- ऋग्वेद, यजुर्वेद व सामवेद जि‍से वेदत्रयी कहा जाता था। मान्यता अनुसार वेद का वि‍भाजन राम के जन्‍म के पूर्व पुरुरवा ऋषि के समय में हुआ था। बाद में अथर्ववेद का संकलन ऋषि‍ अथर्वा द्वारा कि‍या गया। वहीं एक अन्य मान्यता अनुसार कृष्ण के समय में वेद व्यास ने वेदों का विभाग कर उन्हें लिपिबद्ध किया था। इस मान से लिखित रूप में आज से ६५०८ वर्ष पूर्व पुराने हैं वेद। श्रीकृष्ण के आज से ५३०० वर्ष पूर्व होने के तथ्‍य ढूँढ लिए गए हैं।
हिंदू और जैन धर्म की उत्पत्ति पूर्व आर्यों की अवधारणा में है जो ४५०० ई.पू. मध्य एशिया से हिमालय
चित्र:Rigvedic geography.jpg

ऋग्वेद का भूगोलीय क्षितिज (जिसमें नदियों के नाम एवंसीमेटरी एच दिये हैं। ये हिन्दूकुश और पंजाब क्षेत्र से ऊपरी गांगेय क्षेत्र तक फैला हुआ था।
तक फैले थे। आर्यों की ही एक शाखा ने पारसी धर्म की स्थापना भी की। इसके बाद क्रमश: यहूदी धर्म दो हजार ई.पू.,बौद्ध धर्म पाँच सौ ई.पू., ईसाई धर्म सिर्फ दो हजार वर्ष पूर्व, इस्लाम धर्म आज से १४०० वर्ष पूर्व हुआ।
धार्मिक साहित्य अनुसार हिंदू धर्म की कुछ और भी धारणाएँ हैं। मान्यता यह भी है कि ९० हजार वर्ष पूर्व इसका आरंभ हुआ था। रामायण, महाभारत और पुराणों में सूर्य और चंद्रवंशी राजाओं की वंश परम्परा का उल्लेख उपलब्ध है। इसके अलावा भी अनेक वंशों की उत्पति और परम्परा का वर्णन आता है। उक्त सभी को इतिहास सम्मत क्रमबद्ध लिखना बहुत ही कठिन कार्य है, क्योंकि पुराणों में उक्त इतिहास को अलग-अलग तरह से व्यक्त किया गया है जिसके कारण इसके सूत्रों में बिखराव और भ्रम निर्मित जान पड़ता है, फिर भी धर्म के ज्ञाताओं के लिए यह भ्रम नहीं है।
असल में हिंदुओं ने अपने इतिहास को गाकर, रटकर और सूत्रों के आधार पर मुखाग्र जिंदा बनाए रखा। यही कारण रहा कि वह इतिहास धीरे-धीरे काव्यमय और श्रृंगारिक होता गया जिसे आधुनिक लोग इतिहास मानने को तैयार नहीं हैं। वह समय ऐसा था जबकि कागज और कलम नहीं होते थे। इतिहास लिखा जाता था शिलाओं पर, पत्थरों पर और मन पर।
हिंदू धर्म के इतिहास ग्रंथ पढ़ें तो ऋषि-मुनियों की परम्परा के पूर्व मनुओं की परम्परा का उल्लेख मिलता है जिन्हेंजैन धर्म में कुलकर कहा गया है। ऐसे क्रमश: १४ मनु माने गए हैं जिन्होंने समाज को सभ्य और तकनीकी सम्पन्न बनाने के लिए अथक प्रयास किए। धरती के प्रथम मानव का नाम स्वायंभव मनु था और प्रथम ‍स्त्री थी शतरूपा। महाभारत में आठ मनुओं का उल्लेख है। इस वक्त धरती पर आठवें मनु वैवस्वत की ही संतानें हैं। आठवें मनु वैवस्वत के काल में ही भगवान विष्णु का मत्स्य अवतार हुआ था।
पुराणों में हिंदू इतिहास का आरंभ सृष्टि उत्पत्ति से ही माना जाता है। ऐसा कहना कि यहाँ से शुरुआत हुई यह ‍शायद उचित न होगा फिर भी हिंदू इतिहास ग्रंथ महाभारत और पुराणों में मनु (प्रथम मानव) से भगवान कृष्ण की पीढ़ी तक का उल्लेख मिलता है।

गुरुवार, 1 दिसंबर 2011

ओसामा की मौत, शर्मसार हुआ पाक


अमेरिका पर 11 सितंबर के आतंकवादी विमान हमले के बाद से पाकिस्तानी नेता अलकायदा सरगना ओसामा बिन लादेन के अपने मुल्क में मौजूद होने की बात को जोरदार तरीके से खंडन करते रहे हैं, लेकिन उसके एबटाबाद में मारे जाने की अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा की घोषणा से उन्हें अब शर्मसार होना पड़ रहा है।

ओबामा ने सोमवार को यह घोषणा कर पाकिस्तानी नेताओं को शर्मसार कर दिया कि दुनिया का सबसे वांछित आतंकवादी पाकिस्तान में मिलिटरी एकेडमी के पास स्थित एबटाबाद शहर में स्थित एक परिसर में मारा गया है।

पाकिस्तान के राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी, प्रधानमंत्री यूसुफ रजा गिलानी, गृहमंत्री रहमान मलिक और पूर्व सैन्य शासक परवेज मुशर्रफ सहित यहाँ के अन्य नेताओं ने ओसामा के उनके मुल्क में मौजूद होने के बारे में अमेरिकी खुफिया जानकारी से इनकार किया था। (भाषा)

पाक में है दुनिया का सबसे खतरनाक स्थान


पेंटागन के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा है कि पाकिस्तान का सीमावर्ती इलाका दुनिया का सबसे खतरनाक स्थान है और संघीय प्रशासित कबायली क्षेत्र खतरनाक वैश्विक जिहाद के सबसे बड़े केन्द्र बने हुए हैं। राष्ट्रपति बराक ओबामा और पाकिस्तानी अधिकारियों ने भी हाल ही में पाक सीमाई क्षेत्र को 'दुनिया के सबसे खतरनाक स्थान' की क्षेणी में रखा है।

खुफिया रक्षा अवर सचिव माइकल विकर्स ने बताया कि पाकिस्तान के संघीय प्रशासित कबायली इलाके फेडरली एडमिनिस्टर्ड ट्राइबल एरियाज वैश्विक जिहाद के सबसे खतरनाक केन्द्र हैं।

नेशनल डिफेंस यूनिवर्सिटी में इस सप्ताह के शुरू में विकर्स ने एक सम्मेलन में कहा कि यहां पर सक्रिय संगठन जैसे तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान, हक्कानी नेटवर्क और कमांडर नजीर ग्रुप आदि ने न केवल अलकायदा को सुरक्षित पनाह दी बल्कि यह सुनिश्चित करने के लिए एक साझे लक्ष्य पर काम किया कि क्षेत्र से अलकायदा के पैर उखड़ने के बाद भी यह क्षेत्र आतंकवाद से लड़ाई में अमेरिका के लिए मुख्य केंद्र बना रहे।

उन्होंने कहा कि अलकायदा एक परजीवी है जो बिना किसी पालक के जीवित नहीं रह सकता। उन्होंने कहा कि परजीवी अपने पालक को भी नुकसान पहुंचाता है। हाल के महीनों में हमने पाकिस्तान को याद दिलाया है कि उसके साथ हमारे संबंध बिना किसी तनाव या निराशा के हैं।

विकर्स ने कहा कि मतभेदों के बावजूद अमेरिका अपने सहयोगी पाकिस्तान के साथ काम करता रहेगा और लगातार मिलकर अपने दुश्मनों के खिलाफ प्रयास करता रहेगा। (भाषा)

पाकिस्तान से आए हिन्दुओं की व्यथा



कहा- इस्लाम कबूल करने के लिए करते हैं मजबूर
पाकिस्तान में हिन्दुओं पर लगातार लटकते खतरे को महसूस करते हुए वहां से हाल ही में भारत आया 140 हिन्दुओं का एक समूह यहीं रह जाना चाहता है और राजधानी दिल्ली में अपना आशियाना बनाने की चाह रखता है।

पाकिस्तान के सिंध प्रांत से यह समूह पर्यटन वीजा पर भारत आया था। उनके वीजा की अवधि समाप्त हो चुकी है, लेकिन अब इस समूह के सदस्य अपने जन्मस्थान वापस नहीं जाना चाहते क्योंकि उनका मानना है कि पाकिस्तान में उनका भविष्य संकट में रहेगा।

इस हिंदू समूह में 27 परिवारों के सदस्य शामिल हैं और इन लोगों के वीजा की अवधि दो महीने पहले ही समाप्त हो चुकी है। ये लोग पाकिस्तान के हैदराबाद के पास मतियारी जिला स्थित एक गांव के निवासी हैं। इन लोगों का कहना है कि वे भारत में स्वयं को सुरक्षित महसूस करते हैं।

ये लोग उत्तरी दिल्ली स्थित मजनूं का टीला इलाके में एक संगठन की ओर से लगाए गए शिविरों में रह रहे हैं। इस समूह के बुजुर्गों, युवाओं और बच्चों की भारत सरकार से केवल एक ही अपील है कि उनकी वीजा अवधि को बढ़ा दिया जाए और शहर में उन्हें रहने की उचित व्यवस्था मुहैया कराई जाए।

सालों तक इंतजार के बाद पर्यटन वीजा पाने वाले इस 140 पाकिस्तानियों के समूह ने दो सितंबर को पैदल ही सीमा पार की और दो दिन पहले राजधानी दिल्ली पहुंचा।

एक गैर सरकारी संगठन से जुड़े गंगाराम का कहना है कि उन्होंने इस बारे में प्रधानमंत्री मनमाहेनसिंह और कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी को पत्र लिखा है, लेकिन दोनों के पास से अभी तक कोई जवाब नहीं आया है।

एक शिविर में अपने परिजनों और दोस्तों से घिरी, उनके लिए रोटियां सेंक रही 20 वर्षीय यमुना पाकिस्तान छोड़ने की अपनी कहानी सुना रही थी और उसकी आंखों में आशा की एक किरण थी कि कम से कम उसके बच्चों को तो शांतिपूर्ण वातावरण में बेहतर जीवन और शिक्षा मिल सकेगी।

अपने परिवार को भोजन परोसते हुए उसने बताया कि पाकिस्तान में कोई धार्मिक स्वतंत्रता नहीं है। हमें (हिन्दुओं) कभी पढ़ने की इजाजत नहीं मिली। हमें हमेशा निशाना बनाया जाता है। हम भारतीय वीजा के लिए इंतजार कर रहे थे ताकि यहां आकर बस सकें। हम बस वापस नहीं जाना चाहते।

डेरा बाबा धूनीदास की ओर से दिल्ली आए सभी 27 परिवारों को रहने के लिए अलग-अलग तंबू दिए गए हैं। समूह के कुछ युवकों ने तो आसपास की दुकानों में काम करना भी शुरू कर दिया है।

थोड़े समय के लिए स्कूल गई यमुना का कहना है कि इन परिवारों ने अपने घर, भूमि, मवेशी और बाकी सभी चीजें सिर्फ अपने मन में यह प्रार्थना करते हुए छोड़ दी कि ‘भारतीय हमारी मदद करेंगे।’ चन्द्रमा (40) ने यमुना की पाकिस्तान छोड़ने की दास्तान को कुछ यूं पूरा किया।

उन्होंने दावा किया कि कि बच्चे जब स्कूल गए तो उन्हें अलग बैठने के लिए कहा गया। उन्हें वहां पानी तक नहीं मिला। हम डर के साथ नहीं जीना चाहते। इसलिए हम पर्यटन वीजा पर यहां आ गए। उन्होंने कहा कि समुदाय अपने खर्चे खुद उठा सकता है, वह बस अपनी वीजा अवधि बढ़वाना चाहता है और रहने की जगह चाहता है ताकि उनके बच्चे फिर से अपनी शिक्षा शुरू कर सकें। 

इसी समूह का हिस्सा 13 वर्षीय आरती की कहानी किसी को भी भावुक कर सकती है। उसने कभी पढ़ाई नहीं की और उसने अपने दादा-दादी से हिन्दू मंत्र सीखे हैं। जब वह रसोई से छुट्टी पा जाती है तो अपने समूह के अन्य बच्चों को भी मंत्र सिखाती है। अपने भाई के साथ बैठी आरती ने बताया कि मैंने मंत्र सीखे हैं और चाहती हूं कि मेरे दूसरे साथी भी इसे सीखें।

आरती का भाई अपना नाम नहीं बताना चाहता था मगर पूछ रहा था कि वे ऐसा क्यों नहीं कर सकते, हिन्दू होने के बावजूद क्या हम भारत में नहीं रह सकते? उसने कहा कि हजारों की संख्या में बांग्लादेशी, नेपाली और तिब्बती भारत में रह रहे हैं। हम यहां क्यों नहीं रह सकते? सरकार को हमारे लिए व्यवस्था करनी चाहिए ताकि हम अपना जीवन यहां गुजार सकें। 

उसने कहा कि वहां हम शांति से कैसे रह सकते हैं, जबकि हर रोज कोई आता है और हमें इस्लाम कबूल करने के लिए कहता है। पाकिस्तान में अपने गांव में एक मैकेनिक का काम करने वाले सागर ने अपने पड़ोसी की बातों पर मुहर लगाते हुए कहा कि पर्यटन वीजा ही वहां से बाहर निकलने का एक मात्र रास्ता था।

उसने कहा कि हमारे गांव में कुछ लोग आकर हमें मारा करते थे। वह हमारे घरों से सामान उठाकर ले जाया करते थे। परिस्थितियां कभी बेहतर नहीं हुईं और न कभी होंगी। अब हम शांति से जीना चाहते हैं। क्रिकेट खेल रहा 12 वर्षीय अमर कहता है कि हम वापस नहीं जाना चाहते। मैं वापस जाने से डरता हूं। मैं यहीं रहना चाहता हूं। (भाषा)

पाकिस्तानी हिन्दुओं को लौटना ही होगा


सरकार ने मंगलवार को कहा कि भारत आए पाकिस्तान के कई हिन्दू और सिख नागरिक तीर्थयात्रा वीजा वैधता की अवधि समाप्त होने के बावजूद स्वदेश नहीं लौटे हैं और वीजा की अवधि बढ़ाने की मांग भारत सरकार से कर रहे हैं, लेकिन उन्हें पाकिस्तान लौटना होगा।

गृह राज्य मंत्री मुल्लापल्ली रामचंद्रन ने लोकसभा में प्रहलाद जोशी, हरि मांझी और हंसराज अहीर के प्रश्न के लिखित उत्तर में कहा कि समूहिक रूप से तीर्थयात्रा वीजा पर आए पाकिस्तानी नागरिकों को वीजा वैधता अवधि के भीतर अथवा विशिष्ठ मामलों में अल्पकालिक विस्तारित अवधि के भीतर पाकिस्तान लौटना होगा।

उन्होंने कहा कि हिन्दू और सिख समुदाय के पाकिस्तानी नागरिकों से वीजा अवधि बढ़ाने या लम्बी अवधि के वीजा (एलटीवी) के लिए आवेदन प्राप्त हुए हैं।

उन्होंने कहा कि धार्मिक स्थल देखने के लिए सामूहिक रूप से भारत आने वाले पाकिस्तानी नागरिकों को वीज़ा मंजूर करने के लिए निर्धारित शर्तो के अनुसार भारत में समूह में यात्रा करनी होती है और निर्धारित अवधि के भीतर पाकिस्तान लौटना होता है। (भाषा)